Kabhi alwida na kehna :)

तेरी यादो के सहारे जी तो लेंगे खामोश से,
मगर वो हाथ कहा से लाये जो थाम जाते थे हम,
अब भी कुछ वक़्त है तेरे रुखसत होने में,
मगर ये धड़कन अभी से जाने क्यों थम सी गयी है,
लगता है कुछ ऐसे के खो रहे है हम एक किताब,
ज़िन्दगी का एक पन्ना पढ़ने से पहले,
तुझे चिट्ठियाँ नहीं करवटों की नकल भेजेंगे,
अब चादर के नीचे रूखे ख़याल लगाने लगे हैं हम,
दुआ यही है के खुश रहना तू जहां भी रहे,
मत आंसू बहाना वापस आने से पहले,
क्योंकि जब होगी करीब फिर से तू यहां,
आंसू पोछ लेंगे हम आँखों में आने से पहले... 

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